"श्री रामकृष्ण परमहंस" एक प्रसिद्ध धार्मिक गुरु थे, जो 19वीं सदी में भारत में प्रकट हुए थे। उनका असली नाम "गदाधर चट्टोपाध्याय" था। रामकृष्ण परमहंस ने भक्ति, वेदांत और सामाजिक उपदेशों पर अपने विचारों और उपदेशों की प्रशंसा पाई थी। उनका मुख्य शिष्य और अनुयायी स्वामी विवेकानन्द थे, जो उनके विचारों को आगे लेकर आये और 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की।
रामकृष्ण परमहंस ने अलग-अलग धार्मिक धर्मों के अनेक मार्गो का अनुभव किया और प्राचीन धार्मिक ग्रंथों को अध्ययन किया। उनका आध्यात्मिक अनुभव उन्हें समझाता है कि भगवान एक हैं, लेकिन उनका अनेक रूप हो सकता है। उनका जीवन और विचार धार्मिक एकता, संवेदनाशीलता और मैत्री की महत्तवपूर्ण शिक्षा देते हैं। उनका सामायिक सामाजिक सुझाव और सदाचार को सुधारने की प्रेरणा भी थी।
रामकृष्ण परमहंस की विशिष्टता ये थी कि वे अपने अनुभवों को प्राचीन धार्मिक कथाओ और उपन्यासों के माध्यम से व्यक्त करने की कला में माहिर थे। उनकी कथाकला और उपदेशों से उनका प्रभाव उनके अनुयाइयों पर गहरा हो गया है, जो आज भी उनका स्मरण करते हैं और उनके विचारों का अनुशीलन करते हैं।



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